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मानवों में पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ हेतॠजननांग होते हैं, जो सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते हैं। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के जननांगो में सबसे पहले बाल होते है जिसे पà¥à¤¯à¥‚बिक बाल कहा जाता है। ये बाल सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ जननागं को चारों ओर से घेरे रहते है। ऊपर की तरफ à¤à¤• अंग जो उलà¥à¤Ÿà¥‡ वी के आकार की होती है उसे à¤à¤—नासा और à¤à¤—शेफ कहते है। यह à¤à¤¾à¤— काफी संवेदनशील होता है। कà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥‹à¤°à¤¿à¤¸ के नीचे à¤à¤• छोटा सा छेद होता है जोकि मूतà¥à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° होता है।
मूतà¥à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° के नीचे à¤à¤• बड़ा छिदà¥à¤° होता है जिसको जनन छिदà¥à¤° कहते है। इसी के रासà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• महीने महिलाओं को मासिक सà¥à¤°à¤¾à¤µ (माहवारी) होती है। इसी रासà¥à¤¤à¥‡ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® à¤à¥€ होता है। इसकी दीवारे लचीली होती है जो बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® समय फैल जाती है। इसके नीचे थोड़ी सी दूरी पर à¤à¤• छिदà¥à¤° होता है जिसे मलदà¥à¤µà¤¾à¤° या मल निकास दà¥à¤µà¤¾à¤° कहते है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ 7.5 सेमी लमà¥à¤¬à¥€, 5 सेमी चौड़ी तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है। इसका वजन लगà¤à¤— 35 गà¥à¤°à¤¾à¤® तथा इसकी आकृति नाशपाती के आकार के जैसी होती है। जिसका चौड़ा à¤à¤¾à¤— ऊपर फंडस तथा पतला à¤à¤¾à¤— नीचे इसà¥à¤¥à¤®à¤¸ कहलाता है। महिलाओं में यह मूतà¥à¤° की थैली और मलाशय के बीच में होती है तथा गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का à¤à¥à¤•ाव आगे की ओर होने पर उसे à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤µà¤°à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ कहते है अथवा पीछे की तरफ होने पर रीटà¥à¤°à¥‹à¤µà¤°à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ कहते है। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के à¤à¥à¤•ाव से बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® पर कोई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नहीं पड़ता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का ऊपरी चौड़ा à¤à¤¾à¤— बाडी तथा निचला à¤à¤¾à¤— तंग à¤à¤¾à¤— गरà¥à¤¦à¤¨ या इसà¥à¤¥à¤®à¤¸ कहलाता है। इसà¥à¤¥à¤®à¤¸ नीचे योनि में जाकर खà¥à¤²à¤¤à¤¾ है। इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को औस कहते है। यह 1.5 से 2.5 सेमी बड़ा तथा ठोस मांसपेशियों से बना होता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के विकास गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का आकार बढ़कर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की पसलियों तक पहà¥à¤‚च जाता है। साथ ही गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की दीवारे पतली हो जाती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की मांसपेशिया
महिलाओं के गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की मांसपेशियों को पà¥à¤°à¤•ृति ने à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की है। इसका वितरण दो पà¥à¤°à¤•ार से है। पहले वितरन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° लमà¥à¤¬à¥€ मांसपेशियां और दूसरे को घà¥à¤®à¤¾à¤µà¤¦à¤¾à¤° मांसपेशियां कहते है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का विसà¥à¤¤à¤°à¤£ तथा बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय लमà¥à¤¬à¥€ मांसपेशियां पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से कारà¥à¤¯ करती है। घà¥à¤®à¤¾à¤µà¤¦à¤¾à¤° मांसपेशियां बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के बाद गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ तथा रकà¥à¤¤ के बहाव को रोकने में पà¥à¤°à¤®à¥à¤– à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥€ है।
डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थि
महिलाओं में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के दोनों ओर डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थियां होती है। यह देखने में बादाम के आकार की लगà¤à¤— 3.5 सेमी लमà¥à¤¬à¥€ और 2 सेमी चौड़ी होती है। इसके ऊपर ही डिमà¥à¤¬à¤¨à¤²à¤¿à¤•ाओं कि तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ होती है जो अंडों को अपनी ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करती है। डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थियों का रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ होता है। उमà¥à¤° बढ़ने के साथ-साथ ये हलà¥à¤•े सफेद रंग की हो जाती है। वृदà¥à¤µà¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में यह सिकà¥à¤¡à¤¼à¤•र छोटी हो जाती है। इनका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारà¥à¤¯ अंडे बनाना तथा उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ दà¥à¤°à¤µ और हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ बनाना होता है। डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थियों के मà¥à¤–à¥à¤¯ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ ईसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥ˆà¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¨ है। माहवारी (मासिक-धरà¥à¤®) सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¥€à¤¤ होने के पूरà¥à¤µ इसका कोई काम नहीं होता है। परनà¥à¤¤à¥ माहवारी के बाद इसमें पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• महीने डिमà¥à¤¬ बनते और छोड़े जाते है, जो शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के साथ मिलकर गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करते है।
डिमà¥à¤¬à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
डिमà¥à¤¬à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ या गरà¥à¤à¤¨à¤²à¥€ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के ऊपरी à¤à¤¾à¤— के दोनों ओर से निकलती है तथा दोनों तरफ कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ तक जाती है। इनकी लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ लगà¤à¤— 10 सेमी और मोटाई लगà¤à¤— आधा सेमी तक लमà¥à¤¬à¥€ होती है। दोनों ओर इसका आकार à¤à¤• कीप की तरह का होता है। इस कीप का अंतिम छोर लमà¥à¤¬à¥€-लमà¥à¤¬à¥€ अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरफ होता है जिसको तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ कहते है। इनका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारà¥à¤¯ डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थियों से निकले अंडे को घेरकर उसे वाहिनियों में à¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ होता है। यह नलियां मांसपेशियों से बनी, तथा इनके अंदर की दीवार à¤à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ की बनी होती है जिसको मà¥à¤¯à¥‚कस à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ कहते है।
डिमà¥à¤¬à¤—à¥à¤°à¤‚थियों से पकड़े अंडे, वाहिनियों के आगे के à¤à¤¾à¤— में जाकर रूकते है। जहां ये पà¥à¤°à¥‚ष के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के साथ मिलकर à¤à¤• नये जीवन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ जनन अंग में इस संरचना को जाइगोट कहते है। जाइगोट के चारों तरफ à¤à¤• खास परत उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है।
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की यातà¥à¤°à¤¾
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की यातà¥à¤°à¤¾ लगà¤à¤— 23 सेमी लमà¥à¤¬à¥€ होती है। पà¥à¤°à¥‚ष के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ लगà¤à¤— चार सौ करोंड़ की मातà¥à¤°à¤¾ में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते है। पà¥à¤°à¥‚षों के वीरà¥à¤¯ में टेसà¥à¤Ÿà¥€à¤•à¥à¤²à¤°, पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• और सेमीनल वेसाइकिल नाम के तीन दà¥à¤°à¤µ पाये जाते है।
पà¥à¤°à¥‚षों के वीरà¥à¤¯ में पाया जाने वाला सेमीनल वेसाइकिल दà¥à¤°à¤µ ही पà¥à¤°à¥‚ष के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं को जीवित रहने में सहायता करता है। पà¥à¤°à¥‚ष का वीरà¥à¤¯ लगà¤à¤— 15 मिनट में पानी में परिवरà¥à¤¤à¤¨ हो जाता है। योनि का वातावरण अमà¥à¤² (à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤•) के समान होता है। इस वातावरण में पà¥à¤°à¥‚ष के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ जीवित नहीं रह पाते है और धीरे-धीरे नषà¥à¤Ÿ होने लगते है। पà¥à¤°à¥‚ष के कà¥à¤› शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥â€à¤¸à¤°à¤µà¤¾à¤¯à¤•ल कैनाल†में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर जाते है। सरवायकल कैनाल का वातावरण खारा (à¤à¤²à¥à¤•ालिन) होता है। लगà¤à¤— 8 से 10 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ इस वातावरण से होते हà¥à¤ नलों को पार करके आखिरी किनारे पर आकर अंडे से मिलते है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में लगà¤à¤— 1500 से 2000 शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ ही नलों के किनारे तक पहà¥à¤‚च पाते है।
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ और अणà¥à¤¡à¤¾à¤£à¥ का मिलन
पà¥à¤°à¥‚ष के केवल à¤à¤• शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ से ही जीवन की रचना हो सकती है। पà¥à¤°à¥‚ष को शिकà¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के तीन à¤à¤¾à¤— होते है। 1. सिर 2. गरà¥à¤¦à¤¨ 3. दà¥à¤®à¥¤ पà¥à¤°à¥‚षों के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ दà¥à¤® की सहारे सेमिनल वेसाईकल दà¥à¤°à¤µ में तैरते हà¥à¤ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के अंडाणॠतक पहà¥à¤‚चते है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के अणà¥à¤¡à¤¾à¤£à¥ से मिलने के बाद शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं का सिर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के अंडे की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ को फाड़कर उसमें पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर जाता है तथा शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं का गरà¥à¤¦à¤¨ और दà¥à¤® बाहर रह जाता है। जब सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥‚षों के अणà¥à¤¡à¤¾à¤£à¥ और शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ आपस में मिलते है तो जाइगोट का जनà¥à¤® होता है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥‚ष के गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कण आपस में मिलने के बाद बढ़ने लगता है। ये बढ़ते-बढ़ते 2 से 4, 8, 16, 32 कोश बनाते है। यह कोश इसी तरह 265 दिन तक बढ़ने के बाद à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ का आकार लेते है।
मासिक सà¥à¤°à¤¾à¤µ
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को जिस दिन से माहवारी आना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ होता है। उस दिन से वे इसकी गिनती का कारà¥à¤¯ दूसरे लोगों पर छोड़ देते है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में माहवारी पारिवारिक वातावरण, देश, मौसम आदि पर निरà¥à¤à¤° करती है। हमारे देश के गरà¥à¤® तथा तरगरà¥à¤® इलाकों में लड़कियों में मासिक धरà¥à¤® (माहवारी) 10 वरà¥à¤· से 12 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में ही शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है। तथा ठंडे देशों, पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ में यह मासिक धरà¥à¤® 14 या 15 साल की उमà¥à¤° में आती है।
सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अंडेदानी में 10-14 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° से ही उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ दà¥à¤°à¤µ ‘हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸â€™ निकलना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ हो जाते हैं। इस हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ को इसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ कहते है। इस हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ के निकलने के कारण सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के आकार बढ़ने लगता है। तथा धीरे-धीरे इनका विकास होता रहता है। 18 वरà¥à¤· की आयॠतक लड़कियों का शरीर पूरà¥à¤£ रूप से विकसित हो जाता है। इसके बाद सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शरीर में चरà¥à¤¬à¥€ का जमाव, शरीर का गठीला होना, बालों का विकसित होना, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का पनपना और बढ़ना, जननांगों का विकास, नलियों का बढ़ना तथा पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• महीने के बाद माहवारी का आना पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पहचान बन जाती है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ में माहवारी अनियमित रहती है। माहवारी के नियमित होने में कई महीने का समय लग सकता है। परनà¥à¤¤à¥ माहवारी के नियमित रूप से होने के लिठकिसी उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती है। धीरे-धीरे सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में माहवारी सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ ही नियमित रूप से होने लगती है।
हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की बनावट
महिलाओं के शरीर की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की रचना पà¥à¤°à¤•ृति ने विशेष रूप से की है जिससे महिलाà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ का आसानीपूरà¥à¤µà¤• जनà¥à¤® दे सकती है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडà¥à¤¡à¥€ पà¥à¤°à¥‚ष के कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडà¥à¤¡à¥€ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ रखती है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का आकार सेब की तरह का तथा पà¥à¤°à¥‚षों के कूलà¥à¤¹à¥‡ हडिडà¥à¤¯à¤¾à¤‚ दिल के आकार की होती है। कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¤¾à¤‚ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से तीन पà¥à¤°à¤•ार की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से बना होता है। पीछे की तरफ की हडà¥à¤¡à¥€ को सेकà¥à¤°à¤®, दोनों तरफ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को ईलियास तथा सामने की ओर हडà¥à¤¡à¥€ को पà¥à¤¯à¥à¤¬à¤¿à¤¸ कहते है। सेकà¥à¤°à¤® के नीचे पूंछ के आकार की नà¥à¤•ीली हडà¥à¤¡à¥€ होती है जिसको कोसिकà¥à¤¸ कहते है। कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारà¥à¤¯ कूलà¥à¤¹à¥‡ की मांसपेशियों, अंगों तथा बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ जगह देना होता है। जब सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के समय बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देती है। उस समय अधिक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ देने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• जोड़ कà¥à¤› खà¥à¤²à¤¤à¤¾ और ढीला होता है ताकि सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ को आसानी से जनà¥à¤® दे सके।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का रासà¥à¤¤à¤¾ पीछे की ओर चौड़ा तथा आगे की ओर छोटा होता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ होने के समय बचà¥à¤šà¤¾ कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में पहले सीधा नीचे की ओर आता है। फिर 90 अंश के कोण पर घूमने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का रासà¥à¤¤à¤¾
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का रासà¥à¤¤à¤¾ कूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के ऊपर की सतह से नीचे की सतह तक होता है। यह मारà¥à¤— पीछे की ओर चौड़ा तथा आगे की तरफ छोटा होता है। बचà¥à¤šà¥‡ को पैदा होने के लिठकूलà¥à¤¹à¥‡ की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में पहले सीधा नीचे की ओर उतरना पड़ता है। फिर 90 अंश के कोण पर घूमने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होता है। महिलाओं में पà¥à¤°à¤•ृति ने यह कोण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® में आसानी की है नहीं तो बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® लेते ही सीधे नीचे की ओर गिर सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के रासà¥à¤¤à¥‡ की मांसपेशियां सामने की ओर अधिक मजबूत होती है। ये मांसपेशियां बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® में सहायता होती है तथा पीछे और नीचे की मांसपेशियां सामने की मांसपेशियों के तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कमजोर होती है।
कूलà¥à¤¹à¥‡ के नीचे का à¤à¤¾à¤—
कूलà¥à¤¹à¥‡ के नीचे का हिसà¥à¤¸à¤¾ मांसपेशियों और तंतà¥à¤“ं से मिलकर बना होता है। कूलà¥à¤¹à¥‡ का निचला à¤à¤¾à¤— सैकà¥à¤°à¤® हडà¥à¤¡à¥€ से पà¥à¤¯à¥‚बिक सिमà¥à¤«à¤¾à¤ˆà¤¸à¤¿à¤¸ तक होता है। इसमें मल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾, मूतà¥à¤° दà¥à¤µà¤¾à¤° व जनन दà¥à¤µà¤¾à¤° जाकर खà¥à¤²à¤¤à¥‡ है। यह पेट के सà¤à¥€ अंगों को नियंतà¥à¤°à¤£ में रखता है तथा खांसी और छींक आने पर मांसपेशियां पेट के अंगों को नीचे की ओर आने से रोकती है। महिलाओं में कबà¥à¤œ होने के समय मलदà¥à¤µà¤¾à¤° को यहीं मांसपेशियां रोकती है। इन मांसपेशियों को लिवेटर à¤à¤¨à¤¾à¤ˆ कहते है। महिलाओं के योनि की मांसपेशियां बचà¥à¤šà¥‡ के समय à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤•ार का रूप धारण कर लेती है। मांसपेशियों की तंतà¥à¤à¤‚ à¤à¤•-दूसरे से मिलकर à¤à¤• सरल रासà¥à¤¤à¤¾ बनाती है जिससे जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ को अधिक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ सरलतापूरà¥à¤µà¤• मिल जाता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ के सिर की हडिडà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की विशेष à¤à¥‚मिका होती है। सिर की हडिडà¥à¤¯à¤¾à¤‚ के बीच में थोड़ा सा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ होता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय सिर की हडिडà¥à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤•-दूसरे के ऊपर चढ़ जाती है जिससे बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® सरलता और आसानी से हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का रासà¥à¤¤à¤¾ लगà¤à¤— 10 सेंटीमीटर चौड़ा होता है जबकि बचà¥à¤šà¥‡ का सिर मातà¥à¤° 9.5 सेंटीमीटर का होता है। इस कारण पà¥à¤°à¤¸à¤µ आसानी से हो जाता है। यदि बचà¥à¤šà¥‡ के सिर और बचà¥à¤šà¥‡ का आकार अधिक हो या कूलà¥à¤¹à¥‡ का आकार छोटा हो तो à¤à¤¸à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ में बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के लिठआपरेशन करना पड़ सकता है।
मूलाधार
महिलाओं के दोनों टांगों के बीच के तà¥à¤°à¤¿à¤•ोण à¤à¤¾à¤— को मूलाधार या पैरानियम à¤à¥€ कहते है। पैरानियम बाडी मलदà¥à¤µà¤¾à¤° के आगे तथा जननदà¥à¤µà¤¾à¤° के पीछे होती है। इसमें कूलà¥à¤¹à¥‡ के निचले à¤à¤— की सà¤à¥€ मांसपेशियां आपस में मिलती है। यह पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अलग-अलग होती है। किसी में यह कमजोर और किसी में यह अधिक शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ होती है। इस पà¥à¤°à¤•ार से पैरानियम जननदà¥à¤µà¤¾à¤° के पीछे तथा नीचे की दीवार को सहारा दिये रहती है। संà¤à¥‹à¤— कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के समय पैरानियम जननदà¥à¤µà¤¾à¤° को पीछे की ओर से साधे रहती है। बढ़ती आयॠके साथ-साथ यह कमजोर हो जाती है। कूलà¥à¤¹à¥‡ के चरों ओर की मांसपेशियों के यहां à¤à¤•तà¥à¤° होने के कारण यहां का रोग या पस चारों ओर फैल सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के पहले जननदà¥à¤µà¤¾à¤° को यहीं से काटकर चौड़ा बनाया जाता है। ताकि बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय अधिक से अधिक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो सके तथा बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के लिठअधिक चीड़-फाड़ न करना पड़े। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद टांके इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ मांसपेशियों में लगाये जाते है जिसको à¤à¤ªà¤¿à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ कहते है।
कà¥à¤²à¤¾à¤ˆà¤Ÿà¥‹à¤°à¤¸
"CLITORIS" कà¥à¤²à¤¿à¤Ÿà¥‹à¤°à¤¿à¤¸ महिलाओं के जननांग का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ होता है। इसे "फ़ीमेल पेनिस" à¤à¥€ कहा जाता है। महिलाओं में ऑरà¥à¤—ेजà¥â€à¤®/चरम सà¥à¤– तक ले जाने में जननांग के और इस हिसà¥à¤¸à¥‡ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान होता है। इसे "G-Spot" जी-सà¥à¤ªà¥‰à¤Ÿ के नाम से à¤à¥€ जानते है। इसे "फ़ीमेल पेनिस" इस लिठकहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के पेनिस संरचना à¤à¥€ लगà¤à¤— à¤à¤¸à¥‡ ही होती है। उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ के दौरान जैसे पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के जननांग में बदलाव आते है ठीक वैसे ही कà¥à¤²à¤¿à¤Ÿà¥‹à¤°à¤¿à¤¸ में à¤à¥€ बदलाव आता है। पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के पेनिस से अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•रित काफी छोटा होने के वजह से हमारा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ इस तरफ आकृषà¥à¤Ÿ नहीं होता है।
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